Thursday, March 21

जरा-जरा लहराना और सिमट जाना,
बार-बार पलटकर यूँ आना,
समंदर तेरा मस्ताना बेबाकपन,
मुझको भी अब है पाना ।

आज आया हूँ पास तेरे मैं,
जानने तेरी अदाऒं को,
कोई मदहोश होता है कैसे,
देख तेरी फिजाऒं को |

मेरा भी कुछ ऐसा हो जाए,
जान मेरी हो तुझपे फना,
तेरे पानी के लहरों जैसी,
रहे मेरी दुनिय़ा जवां |

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