Thursday, March 21

'अनुभूति'

हो रहा एहसास ये कैसा?
ये कैसी अनुभूति है ?
 मेरे हृदय पे प्रेम की,
बूंदे जब से बरसी हैं ।

मैं ठहरा नादान यहाँ पे,
तू भी तो अनजानी है ।
पर तेरे  लफ्जों के माधुर्य से
दुनिया मेरी मीठी है ।

उठता जब चर्चा महफ़िल में,
जब पूछते लोग तेरे बारे में,
मैं कहता हूँ, ऐ सुनो जमाना !
वो सिर्फ और सिर्फ मेरी अनुभूति है ।

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