Sunday, February 9

"फकीरा"

फकीरा क्या करेगा चेहरों का !
सफ़र में बिछड़ते-मिलते शहरों का !
रिश्तों के बंधन बड़े महंगे यहाँ,
फकीरा क्या करेगा रिश्तों का !

फकीरा तो है मशगूल फिजा में अहसासों की,
हवाओं सा बहता बेफिक्र ।
फकीरा संग जज्बातें हैं,
इबादत में बहती आँखें है ।

फकीरा तो बस सौदागर है रूहों का,
फकीरा क्या करेगा जिस्मों का !



"शशांक"

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