Friday, April 29

"शायद"


शायद हम कहानियां लिखना सिखाते हैं, जीना नहीं ।
शायद हम खुलके कभी कह नहीं पाते कि गलतियां करना भी है अधिकार हमारा ।
शायद कहानियां ढूंढते हैं हम जिंदगी में, जीना नहीं । 
शायद मासूमियत घुट जाती है हमारी सोच सोच के यही,
जीना होता है अलग, कहानियों की तरह तो बिलकुल भी नहीं ।
शायद कहानियों में ही मोहब्बत होती है सिर्फ; जिंदगी में नहीं ।

शायद ये कुछेक पड़ावों की कहानियाँ सिर्फ यादें बन रह जाएँगी ।
शायद जिंदगी की ठीक-ठाक कहानी कभी न बन पायेगी ।
शायद आज बारिश होगी रिमझिम, धरती की प्यास बुझाने ।
शायद मेरी तिश्नगी रहेगी हमेशा मेरी गलतियां बताने ।

1 comment:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शनिवार 18 जून 2016 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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कभी सोचता हूँ समेट दूँ तुम्हारी दास्ताँ कागचों पे अपने शब्दों के सहारे पर बैठता हूँ जब लिखने तुम्हें तो रुक जाता हूँ अब तुम ही बताओ ...