Monday, January 16

आ भी जाओ

कहाँ हो मेरी प्रियतमा तुम,
दिल की तड़प अब तो समझ जाओ,
सदियों से  इंतज़ार है  तुम्हारा,
अब तो आ भी जाओ, अब तो आ भी जाओ |

सावन से पतझड़ तक, पतझड़ से फिर सावन तक
जिंदगी लगती अधूरी हरवक्त
अब तो इस खालीपन को आकर भर जाओ, आकर भर जाओ |



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