Sunday, May 6

दिलों के दर्द जुबान से यूँ बयां नहीं करते, 
कुछ बेवफा क्यूंकि इस बात से भी खफा हो जाते हैं ।

No comments:

Post a Comment

कभी सोचता हूँ समेट दूँ तुम्हारी दास्ताँ कागचों पे अपने शब्दों के सहारे पर बैठता हूँ जब लिखने तुम्हें तो रुक जाता हूँ अब तुम ही बताओ ...