Saturday, September 6

जब से मैं निफ्ट में आया हूँ

जब से मैं निफ्ट में आया हूँ।

दिन हसीं , रात रंगीन बनाया हूँ।

यारों संग खूब ठुमके लगाया हूँ।

जब से मैं निफ्ट में आया हूँ।।


सोचा था न जो कभी,

वो चीजें कर पाया हूँ,

रात-दिन दोस्तों संग बतियाया हूँ,

जब से मैं निफ्ट में आया हूँ।।


आदर किया था जिन गुरुओं का कभी,

उनका ही अब मजाक बनाया हूँ।

कक्षा में पीछे बैठ-बैठ कर,

अपना असमान्य ज्ञान बढाया हूँ।

जबसे मैं निफ्ट में आया हूँ।।


कभी जो बैठता था पढने कभी,

ख़त्म हो जाती थी किताब पूरी।

अब तो पन्नों से किताब बनाया हूँ,

और उन्हें ही पढ़ सारे उत्तर दे आया हूँ।

जबसे मैं निफ्ट में आया हूँ।।


इससे अच्छा मैं यहाँ न होता,

इधर उधर कहीं पढ़ रहा होता,

तब ये माहौल न होता ,

मेरा ये बुरा हाल न होता।।


लेकिन,

इनके बावजूद यहाँ बहुत पाया हूँ।

दोस्तों के हमेशा काम आया हूँ।

जिंदगी को जिन्दादिली सिखलाया हूँ।

अपनी सोच बढाया हूँ।

क्योंकि मैं निफ्ट में आया हूँ॥

1 comment:

  1. dude, you r just bomb poet...you have such a gr8 style that i cannot tell ur execellence...u r gonna fail the best poets of the world by ur style...keep it up...

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