Monday, August 27

सुर्ख गुलाबी हो जाते हैं अक्सर धूप में उसके गाल
शायद सूरज भी होता मस्ताना देख उसकी चाल
अब तो मौला रहमत कर, दे मुझको पी का साथ
बनूँ मैं छतरी उसका हरदम रखने शीतल छांव ||



'शशांक'

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