Thursday, October 4

गर खुदा तू हुस्न का कद्रदान होता,
मेरे रकीबों में पहला तेरा ही नाम होता
और गर मोहब्बत तेरा इमान होता
तू मुझसा ही खुशकिस्मत इंसान होता |

'शशांक'

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