Friday, August 29

क्या कहें

आज कल ना जाने क्या हुआ है ,
रात तो रात , दिन भी खो गया है
कैसे समझों मैं खुदको
कहीं मुझे वो तो नही हो गया है

1 comment:

  1. Intersting..... very interesting
    lekin aapne pahle kabhi bataya hi nahi ki aap v likhte hai...
    aapke 2nd yr room me v mujhe kuchh kuchh mila tha...
    achha tha...

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कभी सोचता हूँ समेट दूँ तुम्हारी दास्ताँ कागचों पे अपने शब्दों के सहारे पर बैठता हूँ जब लिखने तुम्हें तो रुक जाता हूँ अब तुम ही बताओ ...